राजनीति रुद्रप्रयाग

रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट पर टिकट को लेकर कांग्रेस में मचा है घमासान,
पूर्व मंत्री मातवर सिंह कण्डारी के नाम पर चर्चाएं सबसे तेज

रुद्रप्रयाग। चुनावी सरगर्मियां तेज होते ही अब पार्टी हाईकमान के ऊपर प्रत्याशी घोषित करने का समय कम रह गया है। रुद्रप्रयाग विधानसभा की बात करें तो इस बार कांग्रेस की ओर से टिकट को लेकर घमासान देखने को मिल रहा है। पार्टी हाईकमान कभी भी रुद्रप्रयाग से विधानसभा प्रत्याशी घोषित कर सकते हैं, लेकिन जो नाम सबसे आगे चल रहा है वह पूर्व मंत्री मातबर सिंह कण्डारी का है।मातवर सिंह कण्डारी दो बार रुद्रप्रयाग से विधायक के साथ एक बार सिंचाई मंत्री और पर्वतीय विकास मंत्री भी रह चुके हैं। भले ही सन 2012 में वो अपने रिश्तेदार डॉ हरक सिंह रावत से हारे थे, लेकिन 2017 में उन्होंने भाजपा से टिकट की दावेदारी की थी, मगर उस समय मातवर कण्डारी को टिकट नही दिए जाने पर उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और टिकट की दावेदारी भी की। लेकिन उन्हें टिकट नही मिला तो उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मी राणा के लिए काम किया।  मातवर सिंह कण्डारी की बात करे तो क्षेत्र में उनकी जनता के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती है। उनके द्वारा क्षेत्र में किये गए कार्यो की चर्चा अभी तक होने से जनता द्वारा उनको टिकट मिलने के कयास लगाये जा रहे हैं।  कांग्रेस की ओर से कण्डारी को टिकट मिलता है तो वह भाजपा के लिए खतरे की घण्टी साबित हो सकते है। क्यों कि जखोली उनका बहुत बड़ा क्षेत्र है और उन्होंने सिंचाई मंत्री और विधायक रहते हुए क्षेत्र में बहुत काम किये हैं। साथ ही कण्डारी के पर्वतीय विकास मंत्री रहते हुए पेयजल की समस्या, हैंडपंपों का निर्माण,जखोली ब्लॉक में जड़ी-बूटी,चाय की खेती, सिंचाई मन्त्री रहते नलकूपों का निर्माण सिंचाई एवं पेयजल की समस्या जैसे तमाम कार्य क्षेत्र के लिए किए गए हैं। 35 वर्ष के राजनीतिक सफर में कण्डारी ने सक्रियता का परिचय अपने क्षेत्र की जनता के लिए दिया है और एक बार फिर कण्डारी के लिए क्षेत्र की जनता का प्यार जुबां पर सुनाई दे रहा है।

दूसरी ओर नजर डाले तो 2017 में रुद्रप्रयाग विधानसभा से कांग्रेस की प्रत्याशी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी राणा को भाजपा के भरत सिंह चौधरी ने लंबे अंतराल से हराया था। हारने के बाद लक्ष्मी राणा क्षेत्र में जनता के बीच तो रही, लेकिन अपनी पिछली हार की पूर्ति के लिए जनता के साथ तालमेल और जन समर्थन जुटाने में नाकाम साबित होती हुई दिख रही हैं। जिसे देखते हुए लगता है कि कांग्रेस पार्टी हाईकमान इस बार फिर उन पर दांव खेलने पर असहमति जता सकता है।वहीं बात करें कांग्रेस से दावेदारी कर रहे प्रदीप थपलियाल की तो प्रदीप वर्तमान में जखोली से प्रमुख क्षेत्र पंचायत हैं। थपलियाल भी लगातार कांग्रेस से टिकट की उम्मीद जताते हुए जनता के बीच लगातार संपर्क साधते हुए दिखे हैं, लेकिन पिछले विस चुनाव 2017 में प्रदीप ने कांग्रेस से टिकट न मिलने पर नाराजगी जताते हुए निर्दलीय अपनी पार्टी के खिलाफ खड़े हो गये थे, जिसमें उन्हें प्यास बुझने तक ही वोट बैंक मिल पाया था और कांग्रेस को बड़ा नुकसान रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट पर मिला था। ऐसे में इस बार पार्टी किसी अनुभवी और जिताऊ प्रत्याशी को टिकट देती हुई नजर आ सकती है।


दावेदारी की लिस्ट में चौथा नाम अंकुर रौथाण का आ रहा है, जो पूर्व में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। बहरहाल, देखा जाय तो अंकुर युवा होने के बाद भी युवाओं में उनकी पकड़ कुछ खास नहीं दिख पाई है। दावेदारी की लिस्ट में पांचवा नाम पूर्व ब्लॉक प्रमुख अर्जुन गहरवार का है, जो अपने को मजबूत मानते हैं। 2012 में इन्होंने विस चुनाव लड़ा था, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी मातवर सिंह कण्डारी को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार फिर वे खुद को प्रबल दावेदार बता रहे हैं, मगर जनता के बीच इनकी छवि ना के बराबर है। वहीं दावेदारों की बात करें तो नरेन्द्र बिष्ट का नाम भी सामने आ रहा है, जो अभी जिला पंचायत सदस्य भी है। नरेंद्र बिष्ट का भी अपने क्षेत्र में काफी मजबूती है और जनता के बीच अच्छी छवि है, लेकिन अभी बिष्ट को चुनाव में पार्टी के साथ कदम से कदम मिलाकर मजबूती देने के रूप देखा जा सकता है। अन्य दावेदार अगर कोई है भी तो बस खुद का नामदर्ज करने तक सीमित हैं, ताकि आने वाले समय में उन्हें भी जनता के बीच एक चेहरा माना जाय। अब देखने वाली बात यह है कि कांग्रेस पार्टी हाईकमान किसके नाम के आगे मुहर लगाती है और कब तक अपनी पार्टी के टिकटों की लिस्ट जारी करती है, लेकिन इस बार विधानसभा रुद्रप्रयाग के भीतर कांग्रेस अनुभवी चेहरे को टिकट देगी या पिछले जैसा मुकाबला इस बार भी रुद्रप्रयाग सीट पर देखने को मिलेगा, ये जल्द ही सबके समक्ष आने वाला है।

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